भारत महिमा - पंचमः पाठः
विषय-सूची (Table of Contents)
1. भारतवर्ष की महिमा
2. प्रथम श्लोक: देवताओं के गीत
3. द्वितीय श्लोक: भगवान हरि की कृपा
4. तृतीय श्लोक: एकता में अनेकता
5. चतुर्थ श्लोक: विशाल और रमणीय भारत
6. पञ्चम श्लोक: देशभक्ति का आदर्श
7. व्याकरण विशेष (संधि, समास, धातु, अर्थ)
8. MCQ (बहुविकल्पी प्रश्न)
9. Subjective Questions (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
भारतवर्ष की महिमा
अस्माकं देशः भारतवर्षमिति कथ्यते। अस्य महिमा सर्वत्र गीयते। पाठेऽस्मिन् विष्णुपुराणात् भागवतपुराणात् च प्रथमं द्वितीयं च क्रमशः पद्यं गृहीतमस्ति। अवशिष्टानि पद्यान्यध्यक्षेण निर्मीय प्रस्तावितानि। भारतं प्रति भक्तिरस्माकं कर्तव्यरूपेण वर्तते।
हिंदी अनुवाद:
हमारे देश को भारतवर्ष कहा जाता है। इसकी महिमा सर्वत्र गाई जाती है। इस पाठ में विष्णुपुराण और भागवतपुराण से क्रमशः पहला और दूसरा श्लोक लिया गया है। शेष श्लोक अध्यक्ष द्वारा रचकर प्रस्तुत किए गए हैं। भारत के प्रति भक्ति हमारा कर्तव्य है।
प्रथम श्लोक: देवताओं के गीत
गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे।
स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥
हिंदी अनुवाद:
देवता लोग निश्चय ही (भारत के) गीत गाते हैं। धन्य हैं वे मनुष्य जो भारतभूमि के इस भाग में जन्म लिए हैं। यह भूमि स्वर्ग और मोक्ष का स्थान है, जहाँ देवत्व प्राप्त करके मनुष्य बार-बार जन्म लेते हैं।
द्वितीय श्लोक: भगवान हरि की कृपा
अहो अमीषां किमकारि शोभनं, प्रसन्न एषां स्विदुत स्वयं हरिः।
यैर्जन्म लब्धं नृषु भारताजिरे, मुकुन्दसेवौपयिकं स्पृहा हि नः॥
हिंदी अनुवाद:
अहो! इन लोगों ने कौन-सा शुभ कर्म किया होगा कि स्वयं भगवान हरि इन पर प्रसन्न हैं? जिन लोगों ने मनुष्यों में भारत की इस पावन भूमि पर जन्म पाया — भगवान श्री हरि की सेवा के पथ पर चलने की हमारी सच्ची अभिलाषा है।
तृतीय श्लोक: एकता में अनेकता
इयं निर्मला वत्सला मातृभूमिः, प्रसिद्धं सदा भरतम् वर्षमेतत्।
विभिन्ना जनाः धर्मजातिप्रभेदैः, हि एकत्वभावं वहन्तो वसन्ति॥
हिंदी अनुवाद:
यह निर्मल और वात्सल्यमयी मातृभूमि है। यह सदा प्रसिद्ध भारतवर्ष है। विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग यहाँ एकता के भाव को धारण करते हुए निवास करते हैं।
चतुर्थ श्लोक: विशाल और रमणीय भारत
विशालास्मदीया धरा भारतीया, सदा सेविता सागरै रम्यरूपा।
वनैः पर्वतैर्निझरैर्भव्यभूतिर्वहन्तिभिरेषा शुभा चापगाभिः॥
हिंदी अनुवाद:
यह हमारी विशाल भारतीय धरती सदा सागरों से सेवित और रमणीय रूपवाली है। वनों, पर्वतों और झरनों से युक्त यह भव्य भूमि नदियों से शुभ और सुशोभित है।
पञ्चम श्लोक: देशभक्ति का आदर्श
जगद्गौरवं भारतं शोभनीयं, सदास्माभिरेतत् तथा पूजनीयम्।
भवेद् देशभक्तिः समेषाम् जनानां, परादर्शरूपा सदावर्जनीया॥
हिंदी अनुवाद:
यह भारत जगत का गौरव है और शोभनीय है, अतः हमें इसका सदा पूजन करना चाहिए। सभी लोगों में देशभक्ति सर्वोत्तम आदर्श के रूप में सदा आचरणीय (पालनीय) है।
व्याकरण विशेष (Grammar Section)
5 संधियाँ (संस्कृत में)
1. गायन्ति + देवाः = गायन्ति देवाः (यण् संधि)
2. स्वर्ग + अपवर्ग = स्वर्गापवर्ग (दीर्घ संधि)
3. मुकुन्द + सेवौपयिकम् = मुकुन्दसेवौपयिकम् (वृद्धि संधि)
4. सदा + आस्माभिः = सदास्माभिः (दीर्घ संधि)
5. पर + आदर्श = परादर्श (दीर्घ संधि)
5 समास (संस्कृत में)
1. भारतभूमिभागे – षष्ठी तत्पुरुष समास (भारतस्य भूमेः भागे)
2. स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते – बहुव्रीहि समास
3. मातृभूमिः – षष्ठी तत्पुरुष समास (मातुः भूमिः)
4. धर्मजातिप्रभेदैः – द्वन्द्व समास (धर्म और जाति)
5. जगद्गौरवम् – षष्ठी तत्पुरुष समास (जगतः गौरवम्)
5 धातु + प्रत्यय (प्रकृति + प्रत्यय)
1. गै (गाने) + शतृ = गायन्ति
2. भू (होना) + लट् = भवन्ति
3. वस् (निवास) + शतृ = वसन्ति
4. कृ (करना) + क्तवतु = अकारि
5. पूज् (पूजा) + अनीयर् = पूजनीयम्
20 शब्दार्थ (संस्कृत → हिंदी)
1. महिमा = महानता, गौरव |
2. गीयते = गाई जाती है |
3. भक्तिः = भक्ति, प्रेम |
4. कर्तव्यम् = कर्तव्य, जिम्मेदारी |
5. धन्याः = धन्य, कृतार्थ |
6. स्वर्गः = स्वर्ग |
7. अपवर्गः = मोक्ष |
8. पुरुषाः = मनुष्य |
9. प्रसन्नः = प्रसन्न, खुश |
10. जन्म = जन्म |
11. निर्मला = निर्मल, पवित्र |
12. वत्सला = स्नेह करने वाली |
13. एकत्वभावः = एकता का भाव |
14. विशाला = विशाल |
15. रम्यरूपा = सुंदर रूप वाली |
16. निझरैः = झरनों से |
17. शुभा = कल्याणकारी |
18. गौरवम् = गौरव |
19. पूजनीयम् = पूजा करने योग्य |
20. आदर्शः = आदर्श |
बहुविकल्पी प्रश्न (MCQ) - 10 प्रश्न
1. भारतवर्ष किस नाम से जाना जाता है?
a) जम्बूद्वीप
b) भारतवर्ष
c) आर्यावर्त
d) हिमालय
उत्तर: b) भारतवर्ष
2. प्रथम श्लोक किस पुराण से लिया गया है?
a) भागवतपुराण
b) विष्णुपुराण
c) शिवपुराण
d) ब्रह्मपुराण
उत्तर: b) विष्णुपुराण
3. ‘गायन्ति देवाः किल गीतकानि’ में ‘किल’ का क्या अर्थ है?
a) निश्चय ही
b) कभी-कभी
c) शायद
d) इसलिए
उत्तर: a) निश्चय ही
4. भारतभूमि को किस मार्ग के समान बताया गया है?
a) राजमार्ग
b) स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग
c) युद्ध मार्ग
d) वन मार्ग
उत्तर: b) स्वर्ग और मोक्ष का मार्ग
5. द्वितीय श्लोक में किस भगवान की कृपा की चर्चा है?
a) ब्रह्मा
b) शिव
c) हरि (विष्णु)
d) सूर्य
उत्तर: c) हरि (विष्णु)
6. तृतीय श्लोक के अनुसार भारत में लोग कैसे रहते हैं?
a) झगड़ते हुए
b) एकता का भाव धारण करके
c) अलग-थलग
d) केवल वनों में
उत्तर: b) एकता का भाव धारण करके
7. चतुर्थ श्लोक में भारत को किसने सेवित कहा है?
a) पर्वतों ने
b) नदियों ने
c) सागरों ने
d) झरनों ने
उत्तर: c) सागरों ने
8. ‘परादर्शरूपा सदावर्जनीया’ में ‘वर्जनीया’ का अर्थ क्या है?
a) त्यागने योग्य
b) आचरणीय
c) पूजनीय
d) हानिकारक
उत्तर: a) त्यागने योग्य
9. ‘ध्यक्षेण निर्मीय’ का हिंदी अर्थ क्या है?
a) ईश्वर द्वारा बनाकर
b) अध्यक्ष द्वारा रचकर
c) विद्यार्थी द्वारा पढ़कर
d) कवि द्वारा सुनाकर
उत्तर: b) अध्यक्ष द्वारा रचकर
10. भारत को जगत का क्या बताया गया है?
a) शिक्षक
b) गौरव
c) राजा
d) सेवक
उत्तर: b) गौरव
Subjective Questions (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न) - 5 प्रश्न
प्रश्न 1: भारत को ‘स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: भारत को ‘स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूते’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ जन्म लेने वाला मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे चारों पुरुषार्थों को प्राप्त कर सकता है। यह भूमि स्वर्ग और मोक्ष दोनों का मार्ग दिखाने वाली है। यहाँ किए गए शुभ कर्मों का फल स्वर्ग में मिलता है और सच्चे ज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 2: भागवतपुराण के अनुसार भारतभूमि में जन्म को क्यों सर्वश्रेष्ठ माना गया है?
उत्तर: भागवतपुराण के अनुसार भारतभूमि में जन्म इसलिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यहाँ मनुष्य भगवान मुकुन्द (श्री हरि) की सेवा कर सकता है। यह जन्म मोक्ष के द्वार खोलने वाला है। अन्य योनियों या देशों की तुलना में भारत में ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का विकास संभव है।
प्रश्न 3: तृतीय श्लोक में भारत की किन विशेषताओं का वर्णन किया गया है?
उत्तर: तृतीय श्लोक में भारत को निर्मला और वत्सला मातृभूमि बताया गया है। यहाँ विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग एकता के भाव को धारण करके रहते हैं। इस श्लोक में विविधता में एकता भारत की प्रमुख विशेषता बताई गई है। भारत सदा प्रसिद्ध और पूजनीय रहा है।
प्रश्न 4: चतुर्थ श्लोक के अनुसार भारत की भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: चतुर्थ श्लोक के अनुसार भारत की धरती विशाल है, जो तीनों ओर से सागरों से घिरी हुई है। यहाँ सुंदर वन, ऊँचे पर्वत, मीठे जल के झरने और पवित्र नदियाँ हैं। ये सभी भारत को सुंदर, शुभ और भव्य बनाते हैं। सागर, नदियाँ और पर्वत इसकी शोभा बढ़ाते हैं।
प्रश्न 5: पाँचवें श्लोक के अनुसार देशभक्ति किस रूप में होनी चाहिए और क्या त्याज्य है?
उत्तर: पाँचवें श्लोक के अनुसार देशभक्ति समस्त जनों का सर्वोत्तम आदर्श होनी चाहिए। हमें भारत का सदा पूजन करना चाहिए क्योंकि यह जगत का गौरव है। पराई निंदा करना और दूसरों के बुरे आदर्शों का अनुसरण करना पूर्णतया त्याज्य (वर्जनीय) है। सच्ची देशभक्ति में देश की गरिमा बढ़ाना और बुराइयों से बचना शामिल है।
