कर्मवीरकथा — Class 10 Sanskrit | पीयूषम् अष्टमः पाठः

अष्टमः पाठः — कर्मवीरकथा 

Table of Content (विषय-सूची)

1. पाठ का परिचय  

2. भीखनटोला ग्राम एवं कुटिया का वर्णन  

3. शिक्षक का आगमन एवं बालक का प्रेरणा  

4. बालक का परिश्रम एवं उच्च शिक्षा  

5. महाविद्यालय में सफलता एवं प्रथम स्थान  

6. केंद्रीय लोकसेवा परीक्षा में सफलता  

7. कर्मवीर की उपलब्धि एवं सूक्ति  

8. इस पाठ से 5 संधि (संस्कृत)  

9. इस पाठ से 5 समास (संस्कृत)  

10. इस पाठ से 5 धातु + प्रत्यय (संस्कृत)  

11. संस्कृत से हिंदी में 20 अर्थ  

12. 10 MCQ ऑब्जेक्टिव प्रश्न (हिंदी में)  

13. 5 सब्जेक्टिव प्रश्न (हिंदी में 3 वाक्य से अधिक)


1. पाठ का परिचय

परिचयः — पाठेऽस्मिन् समाजे दलितस्य ग्रामवासिनः पुरुषस्य कथा वर्तते। कर्मवीरः असौ निजोत्साहेन विद्यां प्राप्य महत्पदं लभते, समाजे च सर्वत्र सत्कृतो भवति। कथायाः मूल्यं वर्तते यत् निराशः न स्यात्, उत्साहेन सर्वं कर्तुं प्रभवेत्।

Hindi Anuvad 

इस पाठ में समाज के एक दलित ग्रामवासी पुरुष की कथा है। वह कर्मवीर अपने उत्साह से विद्या प्राप्त करके महान पद पाता है और समाज में सर्वत्र सम्मानित होता है। कथा का मूल्य यह है कि निराश नहीं होना चाहिए, उत्साह से सब कुछ करना संभव है।


2. भीखनटोला ग्राम एवं कुटिया का वर्णन

अस्ति बिहारराज्यस्य दुर्गमप्राये प्रान्तरे 'भीखनटोला' नामकः ग्रामः। निवसन्ति स्म तत्र अतिनिर्धनाः शिक्षाविहीनाः क्लिष्टजीवनाः जनाः। तेष्वेव अन्यतमस्य जनस्य परिवारः ग्रामाद् बहिः स्थितायां कुट्याम् अवसत्। कुटी तु जीर्णप्राया स्वात् परिवारजनान् आतपमात्रात् रक्षति, न वृष्टेः। परिवारे स्वयं गृहस्वामी, तस्य भार्या, तयोः एकः पुत्रः, कनीयसी दुहिता च — एतावन्तः एव आसन्।

Hindi Anuvad:

बिहार राज्य के एक दुर्गम प्रांत में 'भीखनटोला' नामक गाँव है। वहाँ अत्यंत निर्धन, शिक्षाविहीन और कठिन जीवन जीने वाले लोग रहते थे। उन्हीं में से एक व्यक्ति का परिवार गाँव के बाहर स्थित एक झोंपड़ी में रहता था। वह झोंपड़ी इतनी जीर्ण-शीर्ण थी कि परिवार के लोगों को केवल धूप से बचाती थी, वर्षा से नहीं। परिवार में स्वयं गृहस्वामी, उसकी पत्नी, एक पुत्र और एक छोटी पुत्री — बस इतने ही सदस्य थे।


3. शिक्षक का आगमन एवं बालक का प्रेरणा

तस्माद् ग्रामात् क्रोशमात्रं दूरे प्राथमिकः विद्यालयः प्रशासनेन संस्थापितः। तत्र एकः नवीनदृष्टिसम्पन्नः सामाजिकसामरस्यरसिकः शिक्षकः आगतः। भीखनटोलां द्रष्टुम् आगतः सः कदाचित् खेलनरतं दलितबालकं विलोक्य तस्य अपाटवरमणीयेन स्वभावेन अभिभूतः। शिक्षकः तं बालकं स्वविद्यालयम् आनीय स्वयं शिक्षितुम् आरभत।

Hindi Anuvad:

उस गाँव से केवल एक कोस दूर प्रशासन द्वारा एक प्राथमिक विद्यालय स्थापित किया गया था। वहाँ एक नवीन दृष्टि से संपन्न और सामाजिक समरसता में रुचि रखने वाले शिक्षक आए। भीखनटोला को देखने आए उस शिक्षक ने एक बार खेलते हुए दलित बालक को देखकर उसके आकर्षक स्वभाव से प्रभावित हो गए। शिक्षक उस बालक को अपने विद्यालय में लाकर स्वयं पढ़ाने लगे।


4. बालक का परिश्रम एवं उच्च शिक्षा

बालकः अपि तस्य शिक्षणशैल्या आकृष्टः शिक्षाम् एव जीवनस्य परमा गतिः इति मन्यमानः निरभरम् अध्यवसायेन विद्याधिगमाय निरतः अभवत्। क्रमशः उच्चविद्यालयं गत्वा तस्यैव शिक्षकस्य अध्यापनेन स्वाध्यवसायेन च प्राथम्यं प्राप। 'छात्राणाम् अध्ययनं तपः' इति भूयोभूयः स्वविद्यागुरुणा उक्तः असौ बालकः चित्तः अर्थाभावेऽपि छात्रवृत्त्या कनीयसां छात्राणां शिक्षणलब्धेन धनेन च नगरगते महाविद्यालये प्रवेशं लेभे।

Hindi Anuvad:

बालक भी उनकी शिक्षण शैली से आकर्षित होकर शिक्षा को ही जीवन की परम गति मानते हुए पूरे मनोयोग से विद्याध्ययन में लग गया। क्रमशः उच्च विद्यालय में जाकर उसी शिक्षक के अध्यापन और अपने परिश्रम से उसने प्राथमिकता (उच्च स्थान) प्राप्त किया। 'छात्रों के लिए अध्ययन ही तप है' — ऐसा बार-बार अपने गुरु द्वारा कहे गए इस बालक ने आर्थिक कठिनाई होने पर भी छात्रवृत्ति से और छोटे छात्रों को पढ़ाकर मिले धन से नगर के महाविद्यालय में प्रवेश पाया।


5. महाविद्यालय में सफलता एवं प्रथम स्थान

तत्रापि गुरूणां प्रियः सन् सततं पुस्तकालये स्वगृहे च सदा विहितचेतसा अकृतकालक्षेपः स्वाध्यायनिरतः अभूत्। महाविद्यालयस्य पुस्तकागारे बहूनां विषयाणां पुस्तकानि आत्मसात् कृतवान्। तत्र स्नातकपरीक्षायां विश्वविद्यालये प्रथमं स्थानम् अवाप्य स्वमहाविद्यालयस्य ख्यातिम् अवर्धयत्। सर्वत्र 'रामप्रवेशरामः' इति शब्दः श्रूयते स्म नगरे विश्वविद्यालयपरिसरे च। न अजानीतां पितरौ अस्य विद्याजन्यां प्रतिष्ठाम्।

Hindi Anuvad:

वहाँ भी गुरुओं का प्रिय बनकर वह सदा पुस्तकालय में और अपने घर में एकाग्रचित्त होकर बिना समय गँवाए अध्ययन में लगा रहा। महाविद्यालय के पुस्तकालय में अनेक विषयों की पुस्तकें उसने आत्मसात कर लीं। स्नातक परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करके उसने अपने महाविद्यालय की कीर्ति बढ़ाई। नगर में और विश्वविद्यालय परिसर में सर्वत्र 'रामप्रवेशराम' नाम सुनाई देने लगा। उसके माता-पिता इस विद्या से मिलने वाली प्रतिष्ठा को नहीं जानते थे।


6. केंद्रीय लोकसेवा परीक्षा में सफलता

वर्षाभये (कतिपयेषु वर्षेषु) सः केन्द्रीयलोकसेवापरीक्षायाम् अपि स्वाध्यवसायेन व्यापकविषयज्ञानेन च उन्नतं स्थानम् अवाप। साक्षात्कारे समितिसदस्याः तस्य व्यापकेन ज्ञानेन, तत्रापि तादृशे परिवारपरिवेशे कृतेन श्रमेण अभ्यासेन च परं प्रीताः अभूवन्।

Hindi Anuvad: 

कुछ ही वर्षों में उसने केन्द्रीय लोकसेवा परीक्षा में भी अपने परिश्रम और व्यापक विषय-ज्ञान से उच्च स्थान प्राप्त किया। साक्षात्कार में समिति के सदस्य उसके विस्तृत ज्ञान से, और विशेषकर ऐसे दरिद्र परिवार व परिवेश में किए गए परिश्रम व अभ्यास से अत्यंत प्रसन्न हुए।


7. कर्मवीर की उपलब्धि एवं सूक्ति

अद्य रामप्रवेशरामस्य प्रतिष्ठा स्वप्रान्ते केन्द्रप्रशासने च प्रभूता वर्तते। तस्य प्रशासनक्षमता संकटकाले च निर्णयस्य सामर्थ्यं सर्वेषाम् आवर्जकं वर्तते। नूनम् असौ कर्मवीरः व्यतीत्य बाधाः प्रशासनकेन्द्रे लोकप्रियः संजातः। सत्यम् उक्तम् — "उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति लक्ष्मीः।"

Hindi Anuvad:

आज रामप्रवेशराम की प्रतिष्ठा अपने प्रांत और केन्द्र प्रशासन में बहुत अधिक है। संकट के समय निर्णय लेने की उनकी क्षमता और सामर्थ्य सभी को आकर्षित करने वाली है। निश्चय ही इस कर्मवीर ने सब बाधाओं को पार करके प्रशासन के केन्द्र में लोकप्रियता प्राप्त की। सत्य ही कहा गया है — "उद्यमी पुरुषसिंह के पास स्वयं लक्ष्मी आती है।"


8. इस पाठ से 5 संधि (संस्कृत)

1. दुर्गमप्राये = दुर्गम + प्राये (स्वर संधि)  

2. नवीनदृष्टिसम्पन्नः = नवीन + दृष्टि + सम्पन्नः (स्वर/व्यंजन संधि)  

3. अपाटवरमणीयेन = अपाटव + रमणीयेन (स्वर संधि)  

4. भूयोभूयः = भूयः + भूयः (विसर्ग संधि)  

5. व्यतीत्य = वि + अतीत्य (स्वर संधि)


9. इस पाठ से 5 समास (संस्कृत)

1. शिक्षाविहीनाः — तृतीया तत्पुरुष समास (शिक्षया विहीनाः)  

2. क्लिष्टजीवनाः — कर्मधारय समास (क्लिष्टं च तत् जीवनम्)  

3. सामाजिकसामरस्यरसिकः — बहुव्रीहि समास  

4. परिवारपरिवेशे — द्वंद्व समास (परिवारश्च परिवेशश्च)  

5. केन्द्रीयलोकसेवापरीक्षायाम् — तत्पुरुष समास


10. इस पाठ से 5 धातु + प्रत्यय (संस्कृत)

1. भू (होना) | विद्यमानता | लट् (तिप्) | भवति |

2. निवस् (रहना) | वास करना | लङ् (तिप्) | निवसन्ति स्म |

3. रक्ष् (बचाना) | रक्षा करना | लट् (तिप्) | रक्षति |

4. श्रु (सुनना) | श्रवण | लङ् (तिप्) | श्रूयते स्म |

5. उद् + इ (जाना) | प्राप्त करना | लिट् (तुस्) | आवर्जकं वर्तते |


11. संस्कृत से हिंदी में 20 अर्थ

| 1 | दुर्गमप्राये = कठिनाई से पहुँचने योग्य |

| 2 | अतिनिर्धनाः = अत्यंत गरीब |

| 3 | क्लिष्टजीवनाः = कष्टपूर्ण जीवन वाले |

| 4 | जीर्णप्राया = लगभग टूटी-फूटी |

| 5 | आतपमात्रात् = केवल धूप से |

| 6 | कनीयसी = छोटी (बेटी) |

| 7 | क्रोशमात्रं = लगभग 2 किमी |

| 8 | संस्थापितः = स्थापित किया गया |

| 9 | अभिभूतः = प्रभावित हुआ |

| 10 | निरतः = तत्पर / लगा हुआ |

| 11 | अध्यवसायेन = पूरे परिश्रम से |

| 12 | भूयोभूयः = बार-बार |

| 13 | अकृतकालक्षेपः = बिना समय गँवाए |

| 14 | आत्मसात् कृतवान् = अपना बना लिया |

| 15 | ख्यातिम् अवर्धयत् = कीर्ति बढ़ाई |

| 16 | अजानीताम् = नहीं जानते थे |

| 17 | उन्नतं स्थानम् = उच्च स्थान |

| 18 | आवर्जकं = आकर्षित करने वाला |

| 19 | नूनम् = निश्चय ही |

| 20 | उद्योगिनम् = उद्यमी पुरुष को |


12. 10 MCQ ऑब्जेक्टिव प्रश्न 


1. 'भीखनटोला' नामक गाँव किस राज्य में है?

a) उत्तर प्रदेश  

b) बिहार  

c) मध्य प्रदेश  

d) पश्चिम बंगाल  

उत्तर: b) बिहार


2. परिवार किस प्रकार की कुटिया में रहता था?

a) पक्का मकान  

b) नई झोंपड़ी  

c) जीर्ण-शीर्ण झोंपड़ी  

d) महल  

उत्तर: c) जीर्ण-शीर्ण झोंपड़ी


3. गाँव से प्राथमिक विद्यालय कितनी दूरी पर था?

a) आधा कोस  

b) एक कोस  

c) दो कोस  

d) तीन कोस  

उत्तर: b) एक कोस


4. बालक को किसने पढ़ाना आरंभ किया?

a) गाँव के मुखिया  

b) पिता ने  

c) शिक्षक ने  

d) पड़ोसी ने  

उत्तर: c) शिक्षक ने


5. गुरु ने बालक से बार-बार क्या कहा?

a) धन कमाओ  

b) खेलो  

c) छात्राणाम् अध्ययनं तपः  

d) परिश्रम मत करो  

उत्तर: c) छात्राणाम् अध्ययनं तपः


6. बालक ने महाविद्यालय प्रवेश कैसे पाया? 

a) पिता के धन से  

b) छात्रवृत्ति और पढ़ाकर अर्जित धन से  

c) चोरी से  

d) भिक्षा माँगकर  

उत्तर: b) छात्रवृत्ति और पढ़ाकर अर्जित धन से


7. स्नातक परीक्षा में उसने कौन सा स्थान प्राप्त किया?

a) द्वितीय  

b) तृतीय  

c) प्रथम  

d) उत्तीर्ण मात्र  

उत्तर: c) प्रथम


8. रामप्रवेशराम ने कौन सी केंद्रीय परीक्षा उत्तीर्ण की? 

a) NEET  

b) JEE  

c) UPSC (लोकसेवा)  

d) NDA  

उत्तर: c) UPSC (लोकसेवा)


9. साक्षात्कार में समिति सदस्य किससे प्रसन्न हुए? 

a) धन से  

b) परिवार के नाम से  

c) व्यापक ज्ञान और परिश्रम से  

d) वेशभूषा से  

उत्तर: c) व्यापक ज्ञान और परिश्रम से


10. पाठ के अंत में कौन सी सूक्ति दी गई है?  

a) विद्या ददाति विनयम्  

b) उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति लक्ष्मीः  

c) सत्यमेव जयते  

d) अहिंसा परमो धर्मः  

उत्तर: b) उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति लक्ष्मीः


13. 5 सब्जेक्टिव प्रश्न 


प्रश्न 1: कर्मवीरकथा का मुख्य संदेश क्या है?  

उत्तर: इस कथा का मुख्य संदेश यह है कि निराश नहीं होना चाहिए। उत्साह और परिश्रम से कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है। दलित और निर्धन व्यक्ति भी विद्या के बल पर महान पद प्राप्त कर सकता है और समाज में सत्कृत हो सकता है।


प्रश्न 2: रामप्रवेशराम के सफल होने में किन-किन कारकों का योगदान रहा?  

उत्तर: रामप्रवेशराम के सफल होने में सबसे पहले उनके गुरु का योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें पढ़ाया। दूसरे, उनके स्वयं के अथक परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास ने उनकी सहायता की। तीसरे, उनके विषयों के व्यापक ज्ञान और समय के सदुपयोग ने उन्हें उच्च स्थान दिलाया।


प्रश्न 3: बालक ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा कैसे जारी रखी?  

उत्तर: बालक ने छात्रवृत्ति का लाभ उठाया। साथ ही वह छोटे छात्रों को पढ़ाकर धन अर्जित करता था। इस प्रकार वह नगर के महाविद्यालय में प्रवेश पाने में सफल रहा और अपनी शिक्षा जारी रखी।


प्रश्न 4: 'उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति लक्ष्मीः' का क्या अर्थ है? कर्मवीर में यह कथन कैसे सत्य होता है?  

उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि उद्यमी पुरुषसिंह के पास स्वयं लक्ष्मी (धन-प्रतिष्ठा) आती है। रामप्रवेशराम ने कठिन परिस्थितियों में भी उद्योग और परिश्रम नहीं छोड़ा। उनकी सफलता और प्रतिष्ठा देखकर स्पष्ट है कि उद्यम ही सच्चा धन है।


प्रश्न 5: शिक्षा ने रामप्रवेशराम के जीवन को कैसे बदल दिया?  

उत्तर: शिक्षा ने उन्हें एक दलित, निर्धन बालक से बड़ा प्रशासक बना दिया। उन्होंने न केवल अपना जीवन सुधारा बल्कि अपने परिवार, विद्यालय और गाँव का नाम भी रोशन किया। शिक्षा ने उनके आत्मविश्वास, ज्ञान और सामुदायिक प्रतिष्ठा को बढ़ाया।