विश्वशान्तिः — Class 10 Sanskrit | पीयूषम् त्रयोदशः पाठः

त्रयोदशः पाठः - विश्वशान्तिः

विषय-सूची (Table of Contents)

1. परिचय: विश्वशान्ति की आवश्यकता

2. विश्व की  अशान्ति

3. पितामह का उपदेश एवं संवाद

4. अशान्ति के मुख्य कारण 

5. आध्यात्मिक समाधान एवं सुभाषितानि

6. संस्कृत व्याकरण (सन्धियाँ, 5 समास)

7. धातु, प्रत्यय एवं अर्थ (20 अर्थ सहित)

8. MCQ वस्तुनिष्ठ प्रश्न (10)

9. Subjective दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5)

10. निष्कर्ष


1. विश्वशान्ति की आवश्यकता

इदानीम् इदं विश्वं परितः अशान्तं वातावरणं प्रसृतं वर्तते। परमाण्वस्त्राणां रासायनिकास्त्राणां च आविष्कारेण जगदिदं भयाक्रान्तं प्रति भाति। क्वचिद् दुर्भिक्षतः कुत्रचिद् राजसत्ताकारणतः क्वचित् प्राकृतिकीभिः आपदिभिः च अशान्तिः सञ्जाता अस्ति।

Hindi Anuvad

आजकल यह संसार चारों ओर से अशांत वातावरण में डूबा हुआ है। परमाणु अस्त्रों और रासायनिक अस्त्रों के आविष्कार से यह संसार भयाक्रांत-सा प्रतीत होता है। कहीं अकाल से, कहीं राजसत्ता के कारण, कहीं प्राकृतिक आपदाओं से अशांति उत्पन्न हो गई है।


2. हृदयविदारक समाचार

इति दुर्गासप्तशत्या: मन्त्रं पठतः पितामहस्य दृष्टिः तस्मिन् वार्तापत्रे आपतिता, यस्मिन् पाकिस्तान देशस्य क्षेत्रविशेषे तालिबानस्य दुष्प्रभावेन प्रवृत्तं हृदयविदारकम् अमानवीय व्यवहारजातं प्रकाशितम् आसीत्। तत् पठित्वा शतवर्षीयः पितामहः मनसा व्यथितः सन् मम युवानं पुत्रं सन्तोषनामधेयं पृच्छति।

Hindi Anuvad

इस प्रकार दुर्गासप्तशती का मंत्र पढ़ते हुए पितामह की दृष्टि उस समाचार-पत्र पर पड़ी, जिसमें पाकिस्तान देश के एक विशेष क्षेत्र में तालिबान के दुष्प्रभाव से हुए हृदयविदारक और अमानवीय व्यवहार का प्रकाशन हुआ था। उसे पढ़कर सौ वर्षीय पितामह मन से व्यथित होकर अपने युवा पुत्र — जिसका नाम संतोष था — से पूछते हैं।


3. पितामह का उपदेश एवं संवाद

पितामहोपदेशः — पुनः वार्तालापप्रसङ्गः समाप्तः। विश्वशान्तेः समस्यायाः यथार्थचित्रं प्रस्तुतम्। अहं पितुः “विश्वशान्तिः” इति मन्त्रे मन्त्रार्थं च चिन्तयन् विश्वव्यापारस्य कारणानि तेषां समाधानस्य उपायान् च अध्ययन् पुत्रः पृच्छति — “अये भोः! कानि कारणानि?”

Hindi Anuvad

फिर वार्तालाप का प्रसंग समाप्त हुआ। विश्व शांति की समस्या का वास्तविक चित्र प्रस्तुत किया गया। मैं अपने पिता के “विश्व शांति” मंत्र के अर्थ पर विचार करते हुए, विश्व के कार्य-व्यवहार के कारणों और उनके समाधान के उपायों का अध्ययन कर रहा था। तब मैंने पूछा — “हे महोदय! इसके कारण क्या हैं?”


4. अशान्ति के मुख्य कारण 

स्नेहाभावे बुभुक्षा च, नकारात्मकचिन्तनम्।

निरक्षरता स्वार्थवृद्धिश्च, अत्याधुनिकतायुक्तता।।

दृष्टप्रसारनीतिश्च, बलिराष्ट्रस्य सर्वदा।

सत्तालिप्सा च दस्यूनां कारणानि हि मुख्यतः।।

Hindi Anuvad

स्नेह का अभाव, भूख, नकारात्मक सोच, अशिक्षा, स्वार्थ की वृद्धि और अत्यधिक आधुनिकता — ये मुख्य कारण हैं। शक्तिशाली देशों की विस्तारवादी नीति और दस्युओं (आतंकवादियों) की सत्ता पाने की इच्छा विश्व की अशांति के प्रमुख कारण हैं।


5. आध्यात्मिक समाधान एवं सुभाषितानि

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।

तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।।

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।

उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।

Hindi Anuvad

इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से आच्छादित है। त्यागभाव से भोग करो, किसी के धन के प्रति लोभ मत करो। सभी लोग सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी शुभ देखें, कोई भी दुःखी न हो। यह मेरा है, वह पराया है — ऐसा सोचना छोटे मन वालों का काम है; उदार हृदय वालों के लिए पूरी पृथ्वी ही परिवार है।


6. संस्कृत व्याकरण (5 सन्धियाँ)

| 1 | च + आविष्कारेण = चाविष्कारेण | वृद्धि सन्धि |

| 2 | हि + अपि = ह्यपि | यण् सन्धि |

| 3 | न + अस्ति = नास्ति | अयादि सन्धि |

| 4 | इति + आह = इत्याह | यण् सन्धि |

| 5 | हृदय + विदारकम् = हृदयविदारकम् | अयादि सन्धि (पूर्वरूप) |


7. 5 समास (Samas)

| 1 | परमाण्वस्त्राणाम् = परमाणूनि च तानि अस्त्राणि | कर्मधारय |

| 2 | विश्वशान्तिः = विश्वस्य शान्तिः | षष्ठी तत्पुरुष |

| 3 | हृदयविदारकम् = हृदयं विदारयति इति | उपपद समास |

| 4 | रासायनिकास्त्राणाम् = रासायनिकानि च तानि अस्त्राणि | कर्मधारय |

| 5 | दुर्भिक्षतः = दुर्भिक्षम् + तसि | अव्ययीभाव |


8. 5 धातु + प्रकृति + प्रत्यय

| 1 | भू (सत्तायाम्) = होना | भू + तुमुन् - भवितुम् |

| 2 | पठ् (वाचि) = पढ़ना | पठ + शतृ (लट्) - पठतः |

| 3 | कृ (करणे) = करना | कृ + क्तवतु - कृतवान् |

| 4 | जन् (जनने) = उत्पन्न होना | जन + क्त - जातः |

| 5 | प्रच्छ् (प्रश्ने) = पूछना | पृच्छ + णिच् + क्त - पृच्छितः |


9. 20 अर्थ (Sanskrit to Hindi)

| 1 | प्रसृतम् - फैला हुआ |

| 2 | आविष्कारेण - आविष्कार द्वारा |

| 3 | भयाक्रान्तम् - भय से ग्रस्त |

| 4 | दुर्भिक्षतः - अकाल से |

| 5 | सञ्जाता - उत्पन्न हुई |

| 6 | फलतः - परिणामस्वरूप |

| 7 | अपेक्षिता - आवश्यकता |

| 8 | व्यथितः - दुखी हुआ |

| 9 | साम्प्रतम् - इस समय |

| 10 | प्रतिक्षणम् - प्रति क्षण |

| 11 | प्रलङ्घकारीणि - उग्र (सीमा तोड़ने वाले) |

| 12 | विद्रूपाणि - विकराल रूप |

| 13 | नग्ननृत्यानि - खुलेआम उत्पात |

| 14 | सङ्कटापन्ना - संकट में पड़ी हुई |

| 15 | निवेदयति - बताता है |

| 16 | बुभुक्षा - भूख |

| 17 | निरक्षरता - अशिक्षा |

| 18 | सत्तालिप्सा - सत्ता पाने की इच्छा |

| 19 | असहिष्णुता - असहनशीलता |

| 20 | विघ्नयति - बाधा डालती है |


10. MCQ (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) – 10

प्रश्न 1: “विश्वशान्तिः” पाठ के अनुसार अशान्ति का प्रत्यक्ष कारण क्या है?

a) अत्याधुनिकता

b) बुभुक्षा (भूख)

c) स्नेहाभाव

d) जातिवाद

उत्तर: b) बुभुक्षा (भूख)


प्रश्न 2: पितामह की दृष्टि किस समाचार पर पड़ी?

a) भारत-चीन युद्ध पर

b) पाकिस्तान के तालिबान प्रभावित क्षेत्र की अमानवीय घटना पर

c) अफ्रीका के अकाल पर

d) यूरोप के आतंकी हमले पर

उत्तर: b) पाकिस्तान के तालिबान प्रभावित क्षेत्र की अमानवीय घटना पर


प्रश्न 3: “नकारात्मकचिन्तनम्” किसे प्रभावित करता है?

a) केवल व्यक्ति को

b) केवल राष्ट्र को

c) व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और विश्व को

d) केवल परिवार को

उत्तर: c) व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और विश्व को


प्रश्न 4: “ईशावास्यमिदं सर्वम्” किस उपनिषद का मंत्र है?

a) केनोपनिषद

b) मुण्डकोपनिषद

c) ईशावास्योपनिषद

d) छान्दोग्योपनिषद

उत्तर: c) ईशावास्योपनिषद


प्रश्न 5: “वसुधैव कुटुम्बकम्” का अर्थ क्या है?

a) पृथ्वी ही परिवार है

b) धन ही सब कुछ है

c) घर ही संसार है

d) मित्र ही रिश्तेदार है

उत्तर: a) पृथ्वी ही परिवार है


प्रश्न 6: पितामह के अनुसार विश्वशान्ति के लिए क्या आवश्यक है?

a) परमाणु शक्ति

b) धर्मनिष्ठा एवं समता

c) धन संग्रह

d) राजनीतिक दल बदलना

उत्तर: b) धर्मनिष्ठा एवं समता


प्रश्न 7: “बलिराष्ट्रस्य दृष्टप्रसारनीतिः” किसे बढ़ावा देती है?

a) शांति को

b) अशान्ति को

c) व्यापार को

d) शिक्षा को

उत्तर: b) अशान्ति को


प्रश्न 8: सन्तोषः किसे कहता है कि “भवान् विचलितो भवति”?

a) मित्र को

b) पितामह को

c) शत्रु को

d) राजा को

उत्तर: b) पितामह को


प्रश्न 9: किस श्लोक में “सर्वे सुखिनः” की कामना की गई है?

a) श्लोक 2

b) श्लोक 4

c) श्लोक 6

d) श्लोक 8

उत्तर: c) श्लोक 6 (सर्वे भवन्तु सुखिनः)


प्रश्न 10: “दस्यूनाम्” शब्द का क्या अभिप्राय है?

a) विद्वान

b) राजा

c) आतंकवादी / असामाजिक तत्व

d) किसान

उत्तर: c) आतंकवादी / असामाजिक तत्व


11. Subjective प्रश्न (5 – दीर्घ उत्तरीय)

प्रश्न 1: पितामह ने विश्व की अशान्ति के मुख्य कारण क्या-क्या बताए? तीन वाक्यों में उत्तर दीजिए।

उत्तर: पितामह ने स्नेहाभाव, बुभुक्षा (भूख), नकारात्मक चिन्तन और निरक्षरता को अशान्ति के मुख्य कारण बताया। साथ ही स्वार्थवृद्धि, अत्याधुनिकतायुक्तता और बलिराष्ट्रों की विस्तारवादी नीति को भी कारण बताया। उन्होंने दस्युओं (आतंकवादियों) की सत्तालिप्सा को सबसे घातक कारण बताया।


प्रश्न 2: “वसुधैव कुटुम्बकम्” का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: इस सूक्ति का अर्थ है कि संपूर्ण पृथ्वी हमारा परिवार है। इसमें सभी मनुष्य, चाहे वे किसी भी देश, धर्म या जाति के हों, भाई-भाई हैं। यह विचार उदार चरित्र वालों के लिए है, जो दूसरों में भी अपना दर्शन करते हैं और सीमाओं से ऊपर उठकर विश्वबन्धुत्व की भावना रखते हैं।


प्रश्न 3: पाठ के अनुसार अध्यात्मिकता अशान्ति को कैसे दूर कर सकती है?

उत्तर: अध्यात्मिकता ‘मैं-तुम’ और ‘अपना-पराया’ के भेदभाव को मिटाकर समभाव स्थापित करती है। यह व्यक्ति को लोभ, मोह और क्रोध जैसी बुराइयों से मुक्त करती है। जब व्यक्ति ईश्वर को सर्वव्यापी मानकर त्यागभाव से जीता है, तो स्वतः ही हिंसा और शोषण समाप्त हो जाते हैं तथा विश्व शांति स्थापित होती है।


प्रश्न 4: सन्तोष ने अपने पितामह को विचलित क्यों बताया?

उत्तर: सन्तोष ने पितामह को विचलित बताया क्योंकि वे सौ वर्ष के बुजुर्ग थे और न तो दूरदर्शन देखते थे, न ही नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ते थे। इस कारण वे आज की हिंसक और अशांत घटनाओं से अपरिचित थे। जब अचानक उन्हें तालिबान के अत्याचारों का समाचार मिला, तो वे आश्चर्यचकित और मानसिक रूप से दुखी हो गए।


प्रश्न 5: विश्वशान्ति स्थापित करने के लिए पितामह क्या उपाय सुझाते हैं?

उत्तर: पितामह धर्मनिष्ठा एवं समता को सबसे बड़ा उपाय बताते हैं। उनके अनुसार दस धर्मलक्षणों का पालन करते हुए लोगों को राग-द्वेष से मुक्त होकर प्रेमपूर्वक रहना चाहिए। उन्होंने ‘ईशावास्य’ का मंत्र, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की कामना और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत को अपनाने का सुझाव दिया। अच्छा आचरण, व्यवहार और सभ्य वार्तालाप को जीवन में उतारने पर बल दिया।